जिन्ना के जिंद को जिंदा करना क्या 2019 की तैयारी तो नहीं ?
आज की तारीख में वर्तमान केंद्र की जो सरकार है यह सरकार अपनी कमियों को छिपाने के लिए तथा देश की जनता को मुद्दे से भटकाने के लिए जिन्ना के जिंद को फिर से जिंदा कर दिया क्योंकि सरकार के 5 साल होने वाले है जबकि 5 वर्षों के भीतर वर्तमान कि केंद्र की सरकार ने कोई काम नहीं किया तो ऐसी स्थिति में सरकार काम की बात करेगी तो जनता सरकार की कमियों को जान जाएगा जनता उनकीकमियों को जान ना जाए जनता को बताने के लिए मुद्दा नहीं बचा तो सरकार के लोगों ने षड्यंत्र से जिन्ना के जिंद को फिर से जिंदा कर दिया जबकि भारतीय मुसलमानों ने जिन्ना को तो 1947 में ही नकार दिया था जब चुनने का वक्त आया तो जिन्ना का पाकिस्तान नहीं, गांधी, नेहरू, पटेल, मौलाना अब्दुल कलाम आज़ाद का भारत चुना। हम जिन्ना वाले नहीं, मौलाना आज़ाद वाले हैं।AMU में 1938 से लटकी जिन्ना की फोटो का विरोध आज क्यों?
जिन्ना ना कभी हमारा आदर्श रहा है न रहेगा
ये तो मुल्क की समस्याओं से ध्यान हटाने का बहाना मात्र है, बेरोजगारी, नोट की कमी, बलात्कार आदि से ध्यान हटाने के लिए समय-समय पर ऐसे कार्यक्रम चलते रहेंगे अपने मुल्क में।
सुनिए विरोध होता तो ये विरोध *जिन्ना महल* का करते सुनिए ये विरोध जिन्ना का नहीं है ये तो 2019 की तैयारी है। अगर जिन्ना का विरोध होता तो ये विरोध *जिन्ना महल* का करते जिस पर महाराष्ट्र सरकार करोड़ो रूपये रख-रखाव में खर्च करती है। या फिर *जिन्ना टावर* का करते जिस पर आंध्रप्रदेश सरकार खर्च करती है।
*जिन्ना के जिंद को जिंदा करना क्या 2019 की तैयारी तो नहीं ?
*ब्रिटानिया बिस्किट*, *गो एयर*, आईपीएल की टीम *किंग्स एलेवन पंजाब*, और *वाडिया ग्रुप* का करते *जिसके मालिक जिन्ना की इकलौती बेटी, दीना जिन्ना के पुत्र नुस्ली वाडिया और जहांगीर वाडिया* हैं।
जिन्ना तो बहाना असली मक़सद मुल समस्याओं से हमारा आपका ध्यान हटाना है
जिन्ना का तस्वीर हटवाना कौन सी बड़ी समस्या है सरकार अगर चाहे तुरंत हटवा सकती है U.P की सरकार बिना हो हल्ला के ऐसा कर सकती थी लेकिन ऐसा करने से वोट का polorization कैसे होगा ? देशभक्ति की ब्रांडिंग कैसे होगी, ये वही लोग हैं जो जिन्ना की मजार पर चादर चढ़ाते हैं ये ढोंगी हैं ठग हैं पाकिस्तान जाते हैं बिरयानी खाते हैं तोहफ़ा लाते हैं और देश में जिन्ना का विरोध कर देशभक्ति का ढोंग करते हैं।
अरविंद सरोज
छात्र नेता इलाहाबाद विश्वविद्यालय
इलाहाबाद



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