Sunday, April 29, 2018

भारत का भविष्य कैसा होगा एक मंथन I

भारत की ऐतिहासिक धरोहरो पर मंडराता हुआ खतरा नजर आ रहा है भारत का भविष्य कैसा होगा ?

आज हम तथा हमारे देश के युवा एक बहुत बड़े संकट से जूझ रहे हैं क्योंकि ऐसा संकट है जिसको पार पाना बड़ा ही मुश्किल लग रहा है क्योंकि जिन्हें इसके देश का भविष्य कहा जाता है इनको भारत की राजनीति अंधेरे की तरफ खींच कर ले जा रही है क्योंकि आपको यह पता होना चाहिए कि भारत में लगभग 65% युवा निवास करते हैं यही हुआ देश की दिशा और दशा को तय करने का माद्दा रखते हैं लेकिन यदि इन युवाओं की शक्ति को गलत दिशा और दशा दिया जाएगा तो भारत के वह दिन दूर नहीं जिस समय भारत पर ऐसी शक्तियों का कब्जा हो जाएगा की छात्र युवा नौजवान बेरोजगार रोजगार के चक्कर में सही गलत का फैसला करना भूल जाए और वह युवा अपने परिवार का अपने समाज का अपने कुटुंब का भरण पोषण करने मैं असफल हो जाएगा तो  वह युवा गलत राह पर चल पड़ेगा तो इसका पूर्ण रूप से जिम्मेदार भारतीय राजनीति में पनप रहे पूंजीवादी व्यवस्था को मैं मानता हूं पूंजीवादी व्यवस्था का विरोध तो नहीं करता लेकिन मैं इस व्यवस्था के नीतियों का विरोध करता हूं क्योंकि पूंजीवादी शक्तियां वर्तमान में भारत की राजनीति अपना दखल देना परोक्ष रूप से प्रारंभ कर दिया है जिसका दुष्परिणाम यह रहा है कि एक इमानदार व्यक्ति नौजवान जो भारत की दिशा और दशा को सही मायने में सुधारने का कार्य करेगा तो  उसको असफलता ही हाथ  लगेगी  इसका  पूर्ण रूप से जिम्मेदार  पूंजीवादी व्यवस्था ही होगी  तो ऐसी स्थिति में हम भारत के लोग पूंजीवादी व्यवस्था को उखाड़ फेंकने का काम करें अन्यथा हमारे ऐतिहासिकता को खत्म करने का जो षड्यंत्र वर्तमान की भारतीय राजनीति में बैठे लोग हैं वह भारत की एकता और अखंडता को तोड़ने में कोई कसर बाकी नहीं रखेंगे तो ऐसी स्थिति में हमको आपको क्या करना चाहिए हमारे आपके कर्तव्य क्या है इस पर विचार करना होगा क्योंकि अभी हाल ही में हमारे देश की शान ऐतिहासिकता की पहचान लाल किला जो भारत ऐतिहासिकता को दर्शाता है ऐसे ऐतिहासिक धरोहर पर जिस प्रकार से राजनीति की जा रही है  दयनीय है आज हमारे इस ऐतिहासिक धरोहर पर पूंजीपतियों का कब्जा दिलाया जा रहा है तो शायद भविष्य में भारत की ऐतिहासिकता को मूर्त रुप देने वाली अनेक इमारतों जैसे ताजमहल क़ुतुब मीनार मंदिर मस्जिद गुरुद्वारा  इत्यादि पर यदि पूंजीपतियों का कब्जा दिला दिया गया तो  हम सभी भारत के निवासी भारत के ऐतिहासिक वस्तुओं पर या ऐतिहासिकता को प्रमाणित करने वाली वस्तुओं पर आम जनमानस विचार करना क्या वहां पर जाकर ऐतिहासिकता को देखने का पर प्रतिबंध लगा दिया जाएगा वहां मात्र पूंजीपतियों के अलावा कोई प्रवेश नहीं कर पाएगा आज वर्तमान की सरकार  भारत के ऐतिहासिक वस्तुओं को  प्राइवेट हाथों में सोप दे रही है इनका प्राइवेटाइजेशन कर दिया तो आने वाली सरकार अपने मन मुताबिक  ऐतिहासिक वस्तुओं को पूंजीपतियों के हाथों में देना चाहेंगे वह कहेंगे कि पिछली सरकार ने ऐसा किया तो मैं भी ऐसा करूंगा ऐसी स्थिति क्यों उत्पन्न करें इस पर हम देश के युवा विचार करें विचार करने के बाद हम सभी एकजुट होकर के सरकार को या सुप्रीम कोर्ट को या हाई कोर्ट को आगे की आने वाली समस्या के विषय में अवगत कराएं जाए अन्यथा आने वाली हमारी पीढ़ियां हमें माफ नहीं करेंगे ज्वलंत मुद्दे पर राजनीति  ना हो इसका हमें ध्यान रखना होगा क्योंकि भारत की एकता और अखंडता को भी बरकरार रखना है.......

No comments:

Post a Comment