Monday, April 30, 2018

 "बुद्ध पूर्णिमा पर विशेष......
महात्मा गौतम बुद्ध  जी का जीवन परिचय



महात्मा
गौतम बुद्ध  जी का जन्म ईसा से 563 साल पहले जब कपिलवस्तु की महारानी महामाया देवी अपने नैहर देवदह जा रही थीं, तो रास्ते में लुम्बिनी वन में हुआ।

यह स्थान नेपाल के तराई क्षेत्र में कपिलवस्तु और देवदह के बीच नौतनवा स्टेशन से 8 मील दूर पश्चिम में रुक्मिनदेई नामक स्थान है, वहां आता है। जहां एक लुम्बिनी नाम का वन था।

उनका नाम सिद्धार्थ रखा गया। उनके पिता का नाम शुद्धोदन था। जन्म के सात दिन बाद ही मां का देहांत हो गया। सिद्धार्थ की मौसी गौतमी ने उनका लालन-पालन किया।

सिद्धार्थ ने गुरु विश्वामित्र के पास वेद और उपनिषद्‌ तो पढ़े ही, राजकाज और युद्ध-विद्या की भी शिक्षा ली। कुश्ती, घुड़दौड़, तीर-कमान, रथ हांकने में कोई उसकी बराबरी नहीं कर पाता।

सिद्धार्थ के मन में बचपन से ही करुणा भरी थी। उनसे किसी भी प्राणी का दुख नहीं देखा जाता था। यह बात इन उदाहरणों से स्पष्ट भी होती है। घुड़दौड़ में जब घोड़े दौड़ते और उनके मुंह से झाग निकलने लगता तब सिद्धार्थ उन्हें थका जान कर वहीं रोक देते और जीती हुई बाजी हार जाते थे। खेल में भी सिद्धार्थ को खुद हार जाना पसंद था क्योंकि किसी को हराना और किसी का दुखी होना उनसे नहीं देखा जाता था।

एक समय की बात है सिद्धार्थ को जंगल में किसी शिकारी द्वारा तीर से घायल किया हंस मिला। उन्होंने उसे उठाकर तीर निकाला, सहलाया और पानी पिलाया। उसी समय सिद्धार्थ का चचेरा भाई देवदत्त वहां आया और कहने लगा कि यह शिकार मेरा है, मुझे दे दो। सिद्धार्थ ने हंस देने से मना कर दिया और कहा कि- तुम तो इस हंस को मार रहे थे। मैंने इसे बचाया है। अब तुम्हीं बताओ कि इस पर मारने वाले का हक होना चाहिए कि बचाने वाले का?

देवदत्त ने सिद्धार्थ के पिता राजा शुद्धोदन से इस बात की शिकायत की। शुद्धोदन ने सिद्धार्थ से कहा कि यह हंस तुम देवदत्त को क्यों नहीं दे देते? आखिर तीर तो उसी ने चलाया था?

इस पर सिद्धार्थ ने कहा- पिताजी! यह तो बताइए कि आकाश में उड़ने वाले इस बेकसूर हंस पर तीर चलाने का उसे क्या अधिकार था? हंस ने देवदत्त का क्या बिगाड़ा था? फिर उसने तीर क्यों चलाया? क्यों इसे घायल किया? मुझसे इस प्राणी का दुख देखा नहीं गया। इसलिए मैंने तीर निकाल कर इसकी सेवा की। इसके प्राण बचाए। हक तो इस पर मेरा ही होना चाहिए।

राजा शुद्धोदन को सिद्धार्थ की बात जंच गई। उन्होंने कहा कि ठीक है तुम्हारा कहना। मारने वाले से बचाने वाला ही बड़ा है। इस पर तुम्हारा ही हक है।

शाक्य वंश में जन्मे सिद्धार्थ का 16 वर्ष की उम्र में दंडपाणि शाक्य की कन्या यशोधरा के साथ हुआ। राजा शुद्धोदन ने सिद्धार्थ के लिए भोग-विलास का भरपूर प्रबंध कर दिया। तीन ऋतुओं के लायक तीन सुंदर महल बनवा दिए। वहां पर नाच-गान और मनोरंजन की सारी सामग्री जुटा दी गई। दास-दासी उनकी सेवा में रख दिए गए। पर यह सब चीजें सिद्धार्थ को संसार से बांधकर नहीं रख सकीं।

●●बौद्ध धर्म के प्रवर्तक 
भगवान बुद्ध का जन्म, ज्ञान प्राप्ति (बुद्धत्व या संबोधी) और महापरिनिर्वाण ये तीनों एक ही दिन  वैशाख पूर्णिमा के दिन ही हुए थे।इसलिये इस दिन को त्रिविध पवित्र बुद्ध पूर्णिमा कहते है। किसी अन्य महापुरुष के साथ आज तक ऐसा नहीं हुआ है। अपने मानवतावादी एवं विज्ञानवादी बौद्ध धम्म दर्शन से भगवान तथागत बुद्ध दुनिया के सबसे महान महापुरुष है। यह त्यौहार भारत, चीन, नेपाल, सिंगापुर, वियतनाम, थाइलैंडजापान, कंबोडिया, मलेशियाश्रीलंका, म्यांमार, इंडोनेशिया, तथा विश्व के कई देशों में मनाया जाता है।
●●●महत्वपूर्ण शिक्षाएं●●●
●बुद्ध ने मध्यम-मार्ग का उपदेश दिया।
●●चार आर्य सत्य
१-दु:ख है ।
2- दु:ख कासमुदय(कारण)है
3-दु:ख निरोध(निवारण)है
4- दुःख निरोध(निवारण का मार्ग) गामिनी प्रतिपदा।
●●अष्टांगिक मार्ग
1-सम्यक दृष्टि –> सत्य तथा असत्य को पहचानने की शक्ति
2-सम्यक संकल्प –> इच्छा एवं हिंसा रहित संकल्प
3-सम्यक वाणी –>  सत्य एवं मृदु वाणी
4-सम्यक कर्म –> सत्कर्म, दान, दया, सदाचार, अहिंसा इत्यादि
5-सम्यक आजीविका –> जीवन यापन का सदाचार पूर्ण एवं उचित मार्ग
6-सम्यक व्यायाम –> विवेकपूर्ण प्रयत्न
7-सम्यक स्मृति –> अपने कर्मो के प्रति विवेकपूर्ण ढंग से सजग रहने की शिक्षा देता है
8-सम्यक समाधि –> चित की एकाग्रता
●●दश शील
●ग्रहस्थों के लिए पांच----
1-अहिंसा(अकारण प्राणी हिसा न करना )
2- विना दिए किसी की वस्तु न लेना ।
3-कामवासना से दूर रहना
4-झूठ न बोलना निंदा न करना ।
5- मद्य सेवन न करना
●भिक्षुओं के लिए पांच-------
6.असमय भोजन न करना
7-सुखप्रद बिस्तर पर नहीं सोना
8- धन संचय न करना
9-स्त्रियो से दूर रहना

10-नृत्य गान आदि से दूर रहना।

"समस्त देश व प्रदेश वासियों को शान्ति करूणा प्रेम तथा मानवता के  पक्षधर का संदेश देने वाले संपूर्ण ब्रह्मांड में बौद्ध धर्म को विस्तार देने वाले  पूरी दुनिया में भारत  वर्ष का मान सम्मान बढ़ाने वाले"
 बौद्ध धर्म के संस्थापक तथागत महात्मा गौतम बुद्ध जी के जयंती  की हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई 



अरविंद सरोज 
छात्र नेता :-इलाहाबाद विश्वविद्यालय इलाहाबाद

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